°आंदोलन जीवी...देश की नई बिरादरी इनसे बचें,आंदोलन खत्म करे किसान; °पीएम मोदी का साफ संकेत आंदोलन चले तो चले,वापस नहीं होंगे कृषि...
°आंदोलन जीवी...देश की नई बिरादरी इनसे बचें,आंदोलन खत्म करे किसान;
°पीएम मोदी का साफ संकेत आंदोलन चले तो चले,वापस नहीं होंगे कृषि कानून;
• किसान आंदोलन को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राज्यसभा में विपक्ष पर जमकर निशाना साधा| पीएम मोदी ने कहा कि हमने पहले बुद्धिजीवी तो सुना था,लेकिन कुछ लोग आंदोलन जी भी हो गए हैं|देश में कुछ भी हो वहां पहुंच जाते हैं |कभी परदे के पीछे और कभी फ्रंट पर |ऐसे लोगों को पहचान कर हमें इनसे बचना होगा| पीएम ने कहा कि यह लोग खुद आंदोलन नहीं चला सकते| लेकिन किसी का आंदोलन चल रहा हो तो वहां पहुंच जाते हैं |यह आंदोलन जीबी ही परजीवी है जो हर जगह मिलते हैं|
• 12 दौर की बातचीत बेनतीजा रही
किसानों और सरकार के बीच अब तक 12 दौर की बातचीत हुई है |लेकिन कोई हल नहीं निकला, किसान इस बात पर अड़े हैं कि सरकार को तीनों कृषि कानून वापस लेनी चाहिए |वही सरकार कह रही है कि वह कानूनों में बदलाव करने को तैयार नहीं| और किसान चाहे तो तीनों कानून डेढ़ साल तक होल्ड भी की जा सकते हैं|
° चर्चा के लिए पीएम की अप्रैल किसानों ने मानी
राज्यसभा में पीएम मोदी ने किसानों को आश्वासन दिया,कि मंडियों का आधुनिक करण किया जाएगा |उन्होंने कहा कि इतना ही नहीं एमएसपी जारी है,और जारी रहेगा |मोदी ने किसानों से आंदोलन खत्म करने की अपील करते हुए कहा,उन्हें [आंदोलनकारियों को ]आंदोलन वापस लेना चाहिए |और हम मिल बैठकर समाधान निकालेंगे |और वार्ता के दरवाजे खुले हुए हैं इस सदन में मैं उन्हें वार्ता के लिए आमंत्रित करता हूं|
° टिकैत बोले भरोसे पर नहीं कानून से चलता है देश
भारतीय किसान यूनियन के नेता राजेश टिकैत ने कहा ;कि प्रधानमंत्री ने आज का है कि एनएसपी है था,और रहेगा| लेकिन उन्होंने यह नहीं कहा कि न्यूनतम समर्थन मूल्य पर कानून बनाया जाएगा देश भरोसे पर नहीं चलता `संविधान और कानून ´पर चलता है|
° इधर मान गए किसान बोले सरकार तारीख तय करें
तीन कृषि कानूनों के विरोध में प्रदर्शन कर रहे किसान संगठनों ने सोमवार को सरकार से कहा कि वार्ता के अगले दौर की तारीख तय करें| प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा उनसे आंदोलन समाप्त करने की अपील करने और वार्ता की निमंत्रण देने के बाद किसान संगठनों ने यह बात कही| संयुक्त किसान मोर्चा के वरिष्ठ सदस्य किसान नेता शिव कुमार काका ने कहा कि वह अगले दौर की वार्ता के लिए तैयार हैं और सरकार को बैठक की तारीख और समय बताना चाहिए| काका ने कहा हमने सरकार से वार्ता से कभी इंकार नहीं किया |जब भी सरकार ने वार्ता के लिए बुलाया, हमने केंद्रीय मंत्रियों से बातचीत की हम उनसे सरकार वार्ता के लिए तैयार है|
नई दिल्ली| प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक बार फिर आंदोलनरत किसानों का आह्वान करते हुए कहा कि न्यूनतम समर्थन मूल्य एमएसपी थी,एमएसपी है और हम एसपी हमेशा रहेगी| उन्होंने राज्यसभा में राष्ट्रपति अभिभाषण के धन्यवाद प्रस्ताव पर जवाब देते हुए गत नवंबर से दिल्ली की सीमा पर आंदोलन कर रहे किसानों को संबोधित करते हुए कहा, आप सब आंदोलन खत्म करें हम सब मिलकर बातचीत कर रास्ता निकालें पीएम मोदी ने आंदोलन कर रहे किसानों से कहा राज्यसभा के माध्यम से मैं आप सभी को बातचीत का न्यौता देता हूं| मगर,किसी को एमएसपी खत्म होने का भ्रम नहीं फैलाना चाहिए|एमएसपी पूर्वथा चलता रहेगा| उन्होंने मुख्य विपक्षी दल पर कटाक्ष करते हुए कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की पोस्ट के भाषण का जिक्र करते हुए कहा कांग्रेस अब यू टर्न ले रही है| राज्यसभा में पीएम मोदी के जवाब में साफ हो गया कि किसानों की मांग के आधार पर नए कृषि कानून केंद्र सरकार वापस नहीं करने जा रही है| प्रधानमंत्री नहीं बल्कि सुधार बाद कदमों को जरूरी करार देते हुए कहा है कि यह वक्त का तकाजा है हमें आगे बढ़ते रहना है| पीछे नहीं ;हमें सुधारवादी कदमों को मौका देना चाहिए| ऐसे कदमों की पहले वकालत करने वाली मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस पार्टी मूल रूप से प्रधानमंत्री के निशाने पर रही| उन्होंने जोर देकर कहा कि देश भर में सीमांत किसानों की संख्या तेजी से बढ़ी है| ऐसे किसान चीन की खेती का रकबा तेजी से सिकुड़ा है आंकड़े के हवाले से प्रधानमंत्री ने बताया कि छोटे-छोटे रखने वाले खेतों वाले किसानों की संख्या 1971 मैं 51 फीस दी थी जो कि अब बढ़कर 86 फ़ीसदी की हो गई है| देश के ऐसे किसान जिनके पास 2 हेक्टेयर से भी कम खेती का रकबा वर्षा है क्या ऐसे सीमांत किसानों के लिए देश की कोई जिम्मेदारी नहीं? प्रधानमंत्री ने कहा अब तक, आई सभी सरकारों ने कृषि सुधार की बात कि, अब सभी यू टर्न ले रहे हैं| प्रधानमंत्री का इशारा कांग्रेसी सरकार और तत्कालीन कृषि मंत्री शरद पवार की तरफ था| प्रधानमंत्री यहीं नहीं रुके उन्होंने कहा कि है ठीक है कि किसान आंदोलन के बहाने आप सब केंद्र सरकार पर आक्रमण कर रहे हैं मगर आप सभी ने अपनी सरकार के समय कहा था कि देश के विकास के लिए कृषि सुधार जरूरी है| इस संबंध में उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के भाषण किस जिक्र करते हुए मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस नेताओं से कहा आप हमारी नहीं तो कम से कम उन्हीं की सुन लेते!
~आंदोलन से भी कहने पर किसानों को आपत्ति
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आंदोलन समाप्त करने की अपील करने और बातचीत के लिए निमंत्रण देने के बाद किसान संगठनों के इस रवैया को सकारात्मक माना जा रहा है उधर किसान संगठनों ने राज्यसभा में प्रधानमंत्री मोदी की टिप्पणी पर आपत्ति भी जताई कि देश में आंदोलनकारियों की नई नस्ल उतरी है जिसे आंदोलन जी भी कहा जाता है|
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